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Saturday, 1 March 2008

स्वार्थों के होते मेहमान-हिंदी शायरी

चेहरे पर है दिखावटी मुस्कान
नहीं होता नीयत का भान
बदन पर हैं जगमगाते वस्त्र धारण किए
दिल में काली नियत लिए
भरोसे के लिए निकल रहे हैं
शब्द जुबान से निरंतर
विश्वास और धोखे का मालुम नहीं अन्तर
मन की आंखों से पढोगे जब उनको
उनके शब्दों के अर्थों का अर्थ समझ में आयेगा
भरोसे और वादों का वजन कम हो जायेगा
झूठी दिखेगी उनकी शान
वह तुम्हारे नहीं
अपने स्वार्थों के होते मेहमान
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Thursday, 28 February 2008

अगर हिट होता है तो बेहूदा भी लिख जाएं-हिंदी शायरी

अगर हिट होता है तो बेहूदा भी लिख जाएं
और चारों तरफ से वाह-वाह जुटाएँ
जैसा पढ़ते हैं पाठक वैसा ही लिखें
जिससे प्यार मिलता हो वैसा दिखें
अगर मन में हैं कूड़ा तो
सोने जैसा कहाँ लिख पायेंगे
लिखना जरूरी है तो लिखते जायेंगे
भले ही कुछ लोगों को पसंद न आयें

सभी लगें है अपना सम्मान बढाने में
अपने आसपास भीड़ जुटाने में
हम क्यों पीछे रह जाएं
जो कहलाते है समाज के शिखर
एक नंबर की दौलत तो कम होती है
उनके पास
करते हैं वह भी दो नंबर से आस
अन्दर होता है सब कुछ काला
चमकते सिक्के लगते हैं बाहर दिखाने
फिर हम क्यों चूकें अपने निशाने


मन में आये जैसा लिखों
पर अपने अन्दर अपने को साफ दिखों
पढ़ने के लिए अच्छा साहित्य ही लायें
दुनिया ढूँढती पढ़ने के लिए व्यस्क सामग्री
तुम चाहे लिख दो
पर अपने बालकों को बाल साहित्य और
बडों को सत् साहित्य पढाएँ
अपने लिखे से तुम दुनिया नहीं बदल सकते
अच्छा लिखा तब तक कोई नहीं पढेगा
जब तक तुम बाजार में सस्ते नहीं बिक सकते
बेहूदा लिखने से परहेज नहीं करना
अगर मंहगे में बिक सकते
मन की बात लिखने के लिए
अपनी महफ़िल अलग सजाएं
मस्तराम 'आवारा की तरह अकेले
रहने के लिए तैयार हो जाएं
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Sunday, 24 February 2008

भरोसा और विज्ञापन-हिन्दी शायरी

अब भरोसा ढूँढने की चीज नहीं रही
टीवी चैनल और पत्र-पत्रिकाएँ
पढ़ते जाओ
ढेर सारी चीजें खरीदो
और भरोसे के साथ हो जाओ
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हमने जो उनसे कहा
''हम पर करो भरोसा
वक्त पर काम आयेंगे''
उन्होंने कहा
''आप वक्त पर किसी के काम आए
ऐसा क्या प्रमाण लाएंगे
हमने टीवी चैनल पर या अखबार में
कहीं आपका नाम नहीं देखा
आदमी के ख़ुद ने कहने से कुछ नहीं होता
उसका विज्ञापन होना भी जरूरी है
अगर ऐसा नहीं है तो
हम भी भरोसा कहाँ कर पायेंगे
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Saturday, 23 February 2008

तब तक प्यार का इन्तजार कर-हिन्दी शायरी

आसमान से कोई हूर आकर
तुझे प्यार करेगी इसका इंतजार न कर
इस जमीन पर नजर रख कर चल
यहाँ भी हूरें बहुत है
पहले अपने दिल से प्यार का इजहार कर
खुले आकाश में कोई ऐसी जगह का
ठिकाना का पता किसी को नहीं है
जहाँ कोई आदमी की हस्ती हो
जहाँ हूरों की बस्ती हो
प्यार पाने के लिए कहीं मिन्नतें मांगने की
कोई जरूरत नहीं
दिल में पैदा होगा तभी मिलेगा और कहीं
और कोई तो तभी करे
पहले तू अपने से इकरार कर
ढूंढ रहे हैं लोग प्यार की दौलत कौडियों के मोल
बोलते हैं झूठ के बोल
सच्चे प्यार की कमी है ज़माने में
पढ़ते हैं जो बहुत ज्ञान की किताबें
वही लगे हैं लोगों को प्यार के नाम पर भरमाने में
तू भीड़ से परे हटकर
अपने दिल में जहाँ कर देख
किस कोने में प्यार रहता है
कहाँ हमदर्दी का दरिया बहता है
फिर चल उस राह पर
जिसका पता तू जानता हो
जब तक देख न ले अपने आप को
तब तक प्यार का इन्तजार कर